स्वामी केशवानंद महाविद्यालय

Grammothan Vidyapeeth Sangaria

सन् 1917 से 1957 तक ग्रामोत्थान विद्यापीठ संगरिया और उसके आसपास का विशाल क्षेत्र जलाभाव से पीड़ित रहा। पेयजल भी दुर्लभ था। स्वतंत्रता के बाद विकास की गंगा भाखड़ा नहर और राजस्थान नहर (अब इंदिरा गांधी नहर) के रूप में इस क्षेत्र में आई। पेयजल के संकट से तो मुक्ति मिली ही, सिंचाई के लिये भी पानी उपलब्ध हो गया। यहां के मेहनती किसान की सदियों पुरानी इच्छा की पूर्ति होने लगी। ऐसे में स्वामी केशवानंद जैसे दूरदर्शी ही सोच सके कि अब यह क्षेत्र देश का अन्न भंडार कहलाने में सक्षम हो सकता है- यदि सिंचाई के इस साधन के साथ ही लोगों को कृषि के उन्नत एवं आधुनिकतम ज्ञान की प्राप्ति हो। स्वामी जी ने अनुभव किया कि इस क्षेत्र में एक कृषि महाविद्यालय होना चाहिए ताकि ग्रामीण लोग उससे लाभ उठाकर कृषि कार्य में उन्नत तकनीक अपना कर अन्नोत्पादन बढा सके।

यह कार्य स्कूल खोलने या अध्यापक प्रशिक्षण संस्थान के समान नहीं था। गैर सरकारी क्षेत्र में राजस्थान में तब कोई कृषि महाविद्यालय नहीं था। लोग व सरकार इसे असंभव मानती थी। स्वामी केशवानंद ने असंभव को संभव बनाने के लिये जन्म लिया था। ग्रामोत्थान विद्यापीठ में कृषि महाविद्यालय की स्थापना के लिये प्रयत्न प्रारंभ कर दिये। लोगों को इसके लिये तैयार करने के लिये गांव गांव घूमने लगे स्वामी जी। राजस्थान विश्वविद्यालय से कृषि महाविद्यालय की मांग की गई। उसने इतनी शर्तें लगा दी कि पूर्ति के लिये कम से कम एक करोड़ रूपया चाहिए। इस शर्त से भी स्वामी जी निराश नहीं हुए। स्वामी जी के बारे में यह मशहूर था कि यदि उन्हें जेब जितना कपड़ा मिल जाता तो वह पूरा कोट बनाने की योजना बना लेते थे।
स्वामी जी ने शर्तों की पूर्ति के लिये सेठ साहूकारों या अमीरों से दान माँगना शुरू नहीं किया। वह जानते थे कि उन्हें सहयोग आम ग्रामीण व्यक्ति से ही मिलेगा। उन्होंने ग्रामवासियों से नकद राशि के साथ साथ जमीन का दान मांगना भी शुरू किया। जब दो तीन साल में प्रयास करने पर भी पर्याप्त साधन नहीं जुटाए जा सके तो कृषि महाविद्यालय का खुलना आगे से आगे टलता रहा। तब स्वामी जी ने एक और भीष्म प्रतिज्ञा की-

"जब तक ग्रामोत्थान विद्यापीठ, संगरिया में कृषि महाविद्यालय खोलने की स्वीकृति नहीं मिल जाती है, मैं संगरिया की सीमा में प्रवेश नहीं करूंगा।"

स्वामी जी ने प्रतिज्ञा की, उसे निभाया भी। लेकिन प्रतिज्ञा कर वह किसी स्थान पर धरने पर नहीं बैठे। बल्कि गांव गांव की अपनी यात्रा का अभियान जारी रखा। बीच बीच में संगरिया की तरफ आये भी। संगरिया की सीमा से बाहर किसी पेड़ के नीचे सरदी-गरमी की परवाह किये बिना बैठते, सोते। लोग मिलने के लिये वहां चले आते।

स्वामी जी की इस प्रतिज्ञा की चर्चा राजस्थान की विधानसभा में हुई। ग्रामीण जनता में यह शिक्षा हठ चर्चा का विषय बन गया। पंचायतों, पंचायत समितियों, कृषि उपजमंडी समितियों एवं नगरपालिकाओं से सहयोग के प्रस्ताव स्वामी जी और सरकार के पास पहुंचने लगे। इस प्रबल जन समर्थन से सरकार अचम्भित रह गई। उसे गैर सरकारी क्षेत्र में कृषि महाविद्यालय खोलने के लिये सहमत होना पड़ा।

राजस्थान सरकार अन्यत्र कृषि महाविद्यालय की स्थापना की इच्छुक थी। राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर के अधिकारी निजी क्षेत्र में कृषि महाविद्यालय की स्थापना को असंभव मानते थे। परंतु स्वामी केशवानंद के सामने सबको झुकना पड़ा।

उस समय राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर के कुलपति डॉ.मोहन सिंह मेहता थे। वह स्वयं अगस्त 1962 में संगरिया पधारे और ग्रामोत्थान विद्यापीठ के प्रांगण में उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कृषि महाविद्यालय खोलने की स्वीकृति की घोषणा की। उन्होंने कहा- स्वामी जी, मैं कृषि महाविद्यालय के खोलने की स्वीकृति देने आया हूँ। आपने बिना साधन क्षमता के इतने बडे़ स्तर पर शिक्षा का प्रारंभ कर रखा है। ईश्वर ने मुझे आज इस लायक बनाया है कि मैं भी इस यज्ञ में अपनी एक आहुति दूं।

स्वामी जी की प्रतिज्ञा पूरी हुई। उसी दिन स्वामी जी ने संस्था में प्रवेश किया।

कृषि महाविद्यालय में बी.एस-सी (कृषि) का चार वर्षीय पाठ्यक्रम शुरू हो गया। स्वामीजी के प्रयास से कृषि उपज मंडी समितियों, पंचायत समितियों, नगरपालिका एवं अन्य संस्थायों तथा ग्रामीण जनता से व्यक्तिगत भूमि-धन की सहायता मिली। स्वामी जी के प्रयासों से महाविद्यालय का नया भवन, छात्रावास,डेयरी,प्रयोगशाला आदि निर्मित हुए और 1968 में कृषि महाविद्यालय अपने नये भवन में स्थानान्तरित हो गया। सन् 1968 में ही इस महाविद्यालय में कला एंव विज्ञान संकाय, सन् 1978 में वाणिज्य एवं 1980 में स्नातकोत्तर कक्षाएं प्रारंभ हुई।

महाविद्यालय का पहले नाम कृषि, कला,विज्ञान महाविद्यालय था। बाद में कृतज्ञ जनता की आग्रह पर इसका सन् 08.03.1994 में स्वामी केशवानंद महाविद्यालय किया गया। इसकी स्वीकृति उसी वर्ष राजस्थान विश्वविद्यालय और यूजीसी से प्राप्त हो गई। अब स्वामी केशवानंद महाविद्यालय बीकानेर से स्वामी केशवानंद कृषि विश्वविद्यालय तथा महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध है।

सन् 1996 के बाद इस महाविद्यालय में अनेक विकास कार्य हुए है तथा नये पाठ्यक्रम एंव संकाय शुरू हुए है। इनमें प्रमाण हैः-


निर्माण कार्य :-
1996 से अब तक निर्मित कार्य सत्र राशि उपलब्धता
1.प्रशासनिक भवन 1997-98 8 लाख (अनुमानित) यू.जी.सी.
2. कक्षा-कक्ष (11,12,13,14) 1998-99 14 लाख (अनुमानित) संस्था द्वारा
3. जन्तु विज्ञान एवं रसायन शास्त्र प्रयोगशाला 2001-02 15 लाख (अनुमानित) यू.जी.सी.
4. कम्प्यूटर विभाग प्रयोगशाला 2006-07 - -
5. कक्षा-कक्ष 15,16,17 2009-10 12 लाख (अनुमानित) यू.जी.सी.
6. स्वागत कक्ष 2011-12 9 लाख (अनुमानित) संस्था द्वारा
7. गर्ल्स कॉमन रूम 2011-12
8. इण्डोर स्टेडियम 2014-15 70 लाख (अनुमानित) यू.जी.सी.
9. पुस्तकालय छत का पुनःनिर्माण 2014-15 25 लाख (अनुमानित) यू.जी.सी.
10. प्रयोगशाला उपकरण 2014-15 लाख (अनुमानित) यू.जी.सी.


नये पाठ्यक्रम एवं विषय विषय प्रारम्भ सत्र
एम.एस.सी. कम्प्यूटर विज्ञान 2004-05
एम.एस.सी. रसायन विज्ञान 2006-07
एम.ए./एम.एस.सी. भूगोल 2009-10
एम.ए. अंग्रेजी 2009-10
बी.सी.ए. 2010-11
एम.ए. पंजाबी 2013-14
एम.ए. राजनीति विज्ञान 2013-14

महाविद्यालय के अनेक छात्र -छात्राओं ने विशिष्ट उपलब्धियों प्राप्त की हैं। इनमें प्रमुख हैं-

1 वरूण गोदारा /श्री हेम राज गोदारा (कृषि 2004-05 स्वर्ण पदक विजेता मैनेजर राजस्थान वेयर हाउस निगम)

2 भावना गुप्ता /श्री सुभाष गुप्ता (विज्ञान 2009-10 स्वर्ण पदक विजेता म.गं.सि.वि.बी. में प्रथम स्थान)

3 रमन गोयल /श्री प्रदीप कुमार (विज्ञान(नाॅन मेडिकल) 2015-16 रजत पदक विजेता म.गं.सि.वि.बी. में प्रथम स्थान)

4 गार्गी शर्मा /श्री चन्द्र शेखर कृषि (2015-16 कांस्य पदक विजेता स्.के.रा.कृ.वि.बी. में तृतीय स्थान)

महाविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धि महाविद्यालय के कृषि संकाय में अतिरिक्त 60 सीटो की वृद्धि सत्र 2015-16

इस महाविद्यालय में अनेक महत्वपूर्ण व्यक्तियों द्वारा विजिट किया गया है इनमें प्रमुख है।-

महत्वपूर्ण अतिथि

1 माननीय पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी ओमप्रकाश जी चौटाला

2 प्रो. सम्पत सिंह

3 श्री बलवंत सिंह रामूवालिया

4. श्री हरिदेव जोशी

5. श्री भैरों सिंह शेखावत मुख्यमन्त्री हरियाणा सरकार ,वित्त मन्त्री हरियाणा सरकार,सांसद हरियाणा,1996

6 श्री ज्ञान प्रकाश पिलानियां राज्य सभा सदस्य 2007

7 श्री राम सिंह कस्वां लोक सभा सदस्य चुरू 2015

8 श्री अभिषेक मटोरिया विधायक नोहर 2015

9 सरदार मनजीत सिंह सचिव स्वायत्त शासन विभाग 2015

10 श्री के.के.पाठक सचिव सी.एम.ओ. 2014

अतिविशिष्ट अतिथि

1.श्रीमति वसुन्धरा राजे मुख्यमन्त्री राजस्थान सरकार 2014

2.श्री अरूण चर्तुवेदी मन्त्री राजस्थान सरकार 2014


इनमें प्रशासनिक खंड, विज्ञान खंड, पुस्तकालय, केन्टीन, प्रयोगशालाएं, कक्षाकक्ष 20 हैं। महाविद्यालय के साथ ही डेयरी, बाग, कृषि फार्म आदि हैं। सभी तरह के खेलों की सुविधा है। कई खेल मैदान और इंडोर स्टेडियम है। महाविद्यालय के साथ ही छात्रावास हैं, जिसमें 85 छात्र निवास कर रहे हैं। वर्तमान में महाविद्यालय में प्राचार्य श्री दर्शन सिंह के अलावा 32 शिक्षक स्टाफ एवं 46अन्य कर्मचारी हैं। महाविद्यालय के बीचोबीच स्वामी केशवानंद जी भव्य प्रतिमा स्थापित है।