ग्रा.वि. उच्च माध्यमिक विद्यालय,संगरिया

Grammothan Vidyapeeth Sangaria

ग्रामोत्थान विद्यापीठ संगरिया का सबसे पुराना विभाग उच्च माध्यमिक विद्यालय हैं। सन् 1917 में यहां चौ. बहादुर सिंह भोभिया ने जाट मिडिल स्कूल की स्थापना की थी। स्वामी केशवानंद जी ने इसी विद्यालय का संचालन भार 1932 में संभाला था। सन् 1943 में यही विद्यालय क्रमोन्नत हुआ। सन् 1948 में संस्था का नाम ग्रामोत्थान विद्यापीठ हुआ। सबसे पहले इसी विद्यालय द्वारा इलाके में शिक्षा का प्रचार प्रसार शुरू हुआ। पहले विद्यालय कच्चे कोठों में चलता था। स्वामी जी ने इलाके से सहयोग लेकर पक्के भवन बनाने शुरू कर दिये थे। उसी दौरान बना विद्यालय भवन आज भी अपनी भव्यता से आकर्षित करता है।

यह विद्यालय सन् 1955 में ग्यारहवीं कक्षा तक क्रमोन्नत हुआ विद्यालय में काष्ठकला, चित्रकला , धातुकला , सिलाई कला आदि का प्रशिक्षण भी छात्रों को दिया जाता रहा है।इसलिये ग्हारहवीं कक्षा तक क्रमोन्नत होने पर विद्यालय का नाम बहुद्देशीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हो गया। इसमें कला, विज्ञान, कृषि और वाणिज्य के संकाय चलते रहे हैं।

सन् 1988 में 10+2 को पद्धति से विद्यालय में पठन-पाठन शुरू हुआ और तब से विद्यालय का नाम ग्रामोत्थान विद्यापीठ उच्च माध्यमिक विद्यालय है।

प्रारंभ से ही विद्यालय के छात्रों ने खेलों में अपनी उच्चता का प्रदर्शन किया है। इस विद्यालय में कई बार जिला स्तरीय और राज्यस्तरीय खेल प्रतियोगिताएं और राज्यस्तरीय खेल प्रतियोगिताएं आयोजित हुई है।विद्यालय के पास फुटबाॅल, वाॅलीबाॅल, हाॅकी आदि सभी खेलों के लिये मैदान एवं अन्य सुविधाएं सदा से विद्यमान रही हैं।

विद्यालय में विशाल पुस्तकालय है, जिसमें लगभग 8900 पुस्तकें है और 14 पत्र-पत्रिकाएं नियमित रूप से आती हैं। विद्यालय में समाज के कमजोर तबके के छात्रों को पढने केी सुविधा उपलब्ध करवाने के लिये समाज कल्याण विभाग से उनके लिये निशुल्क छात्रावास का संचालन 61 वर्षों से किया जा रहा है। अन्य छात्रों के लिये प्रारंभसे छात्रावास की सुविधा उपलब्ध है।

विज्ञान और कृषि के सभी विषयों के लिये सर्वसुविधायुक्त 06 प्रयोगशालाएं हैं। कृषि विषय के प्रशिक्षणार्थ विद्यालय के पास अपनी कृषि भूमि है।

विद्यालय में अब 375 छात्र तथा शिक्षक स्टाफ एवं 31 अन्य स्टाफ है। विद्यालय में कक्षा कक्ष, हाल, कार्यालय आदि हैं।

सन् 1996 के बाद पुराने स्कूल भवनों एवं छात्रावासों की मरम्मत की गई है। स्वामी केशवानंद स्मृति चैरिटेबल ट्रस्ट से प्राप्त सहायता राशि एक लाख रूपये से छात्राओं के काॅमन रूप बनाया गया है। लड़कों का स्कूल होने पर भी कुछ विषयों के लिये लड़कियां प्रविष्ट होती हैं। वि़द्यालय में महिला शिक्षक स्टाफ भी है। विद्यालय के पुराने ऐतिहासिक भवन की मरम्मत के लिये भी ट्रस्ट से दो लाख रूपये की सहायता प्राप्त हुई है।

विद्यालय के छात्रों ने खेल,एनसीसी, एन.एस.एस. , विज्ञान एवं अन्य प्रतियोगिताओं में श्रेष्ठता का प्रदर्शन किया है।

पुराने कर्मचारियों को ग्रेच्यूटी पी.एल.आदि के मद में विद्यालय से अब तक 72लाख रूपये का भुगतान किया गया है।

इस विद्यालय का राजकीय अनुदान सन् 2011 में बंद हो गया था। उससे पूर्व का अनुदान लगभग रू.76 लाख शिक्षा विभाग की ओर बकाया है।