ग्रामोत्थान विद्यापीठ शिक्षा महाविद्यालय, संगरिया

Grammothan Vidyapeeth Sangaria

स्वामी केशवानंद जी ने 1945 से 1958 के बीच स्कूल खोलने का महाअभियान चलाया था। स्कूलों के लिए अध्यापकों की जरूरत वे दूरस्थ प्रदेशों से योग्य शिक्षकों को बुलाकर पूरी करते थे। उन्हें विचार आया कि क्यों न स्थानीय युवकों को ही अध्यापक बनाया जाए। उन्होंने सन् 1956 संस्था में शिक्षण प्रशिक्षण विद्यालय स्थापित किया। यह शि.प्र.वि.(एस.टी.सी.) सन् 2001 तक स्वतंत्र रूप से एक विभाग की तरह अध्यापकों को प्रशिक्षण देता रहा। इस विद्यालय में न केवल राजस्थान के बल्कि पड़ौसी पंजाब और हरियाणा के युवा भी प्रशिक्षण प्राप्त कर शिक्षक बने। विद्यालयों की क्रमोन्नति के साथ ही बी.एड. योग्यताधारी शिक्षकों की भी जरूरत हुई। इस आवश्यकता की पूर्ति के लिये सन् 1965 में ग्रामोत्थान विद्यापीठ,संगरिया में शिक्षा महाविद्यालय की स्थापना हुई । प्रारम्भ में इसमें 120 सीटें स्वीकृत हुई थी जो अब 200 हो गई है ।

शिक्षा महाविद्यालय का परीक्षा फल प्रतिवर्ष शतप्रतिशत रहा है। यहां विकास का दूसरा द्वार तब खुला जब सन् 1986 में एम.एड का प्रशिक्षण प्रारंभ हुआ। प्रारंभ में 15 सीटें स्वीकृत हुई जो अब 50 हैं।

नई शिक्षा नीति 1986 लागू होने के उपरान्त इस महाविद्यालय को 1994 में केन्द्र प्रवर्तित योजना अन्तर्गत सी.टी.ई. (शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय) का दर्जा दिया गया।

सन् 2004-05 में इग्नू का पाठ्यक्रम भी प्रारंभ हुआ। यह बीकानेर संभाग का एक मात्र अध्ययन केन्द्र है, यहां बी.एड. के 100 विद्यार्थी आते हैं। कुछ वर्ष तक इस महाविद्यालय में पुस्तकालय प्रमाण पत्र का पाठ्यक्रम भी जारी रहा।

सन् 2005-06 में शिक्षक प्रशिक्षण विद्यालय भी इसके भाग के रूप में जुड़ गया। इसमें प्रतिवर्ष 100 छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया जाता है यह दो वर्षिय प्रशिक्षण है।

महाविद्यालय में 33 कक्षा कक्ष, 4 विशाल हाल, कांफ्रेस हाल, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, केन्टीन, खेल मैदान, पार्क एवं पुरूष -महिला पृथक-पृथक दो छात्रावास हैं। स्टाफ संख्या 38 शिक्षक, 6 कनिष्ठ लिपिक व 17 अन्य कर्मचारी हैं।

सन् 1996 के बाद शिक्षा महाविद्यालय में अनेक नये भवन, छात्रावास भवन, तरणताल एवं अन्य भवन बने है।

सी.टी.ई., यू.जी.सी. एवं स्वयं महाविद्यालय के कोष से अनेक विकास कार्य हुए हैं। पुरूष छात्रावास पर 15 लाख रूपये खर्च हुए हैं। ट्यूटोरियल कक्ष के लिए यूजीसी से 5,18,920 रूपये प्राप्त हुए हैं। ट्यूटोरियल कक्ष पर महाविद्यालय के कोष से राशि मिलाकर सात लाख रूपये व्यय हुए है। केन्टीन एवं लैब निर्माण पर 11 लाख 66 हजार रूपये व्यय हुए है। महाविद्यालय के अन्तर्गत बने अंतर्राष्ट्रीय स्तर के तरणताल पर वि.वि. अनुदान आयोग से 89.32 लाख रूपये महाविद्यालय से 9.92 लाख रूपये कुल 99 लाख 25 हजार रूपये व्यय हुए हैं।

महिला छात्रावास के लिए यूजीसी से 52 लाख रूपये प्राप्त हुए। इसमें महाविद्यालय 46 लाख रूपये मिलाकर 1 करोड 10 लाख रूपये का निर्माण करवाया गया ।

इस तरह भवन निर्माण पर महाविद्यालय से रू. 57,24,946 रूपये खर्च को मिलाकर 3,08,56,546रू. 1996-97 से 2015-16 तक व्यय हुए हैं।

इसके अतिरिक्त महाविद्यालय में कई विशेष गतिविधियां भी हुई हैं।

उल्लेखनीय है कि महाविद्यालय के प्राचार्य सम्बद्ध महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर में शिक्षा संकाय के डीन एवं सम्मानीत पद बोर्ड आॅॅॅफ मैनेजमैंट के सदस्य मनोनित किये गये हैं।

नेशनल सेमिनार, सीटीई में राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार एवं कार्यशाला का आयोजन, सीटीई के अन्तर्गत हनुमानगढ एवं श्रीगंगानगर जिले के वरिष्ठ अध्यापकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन भी सन् 2000 से किया जा रहा है। रमसा विभाग के सन्दर्भ व्यक्तियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन व रमसा विभाग की माॅनिटरीग का कार्य, चुरू, हनुमानगढ एवं श्री गगांनगर जिले के डीपीई के अध्यापकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी योग दिवस पर आयोजन किया गया।

अतिथियों का विवरण -

चौधरी ओमप्रकाश चौटाला पूर्व मुख्यमन्त्री हरियाणा द्वारा स्वीमिंग पूल का शिलान्यास किया गया। यू.जी.सी. द्वारा प्रायोजित राष्ट्रीय सेमीनार आयोजित किया गया जिसमें विश्ववि़द्यालय अनुदान आयोग क्षेत्रीय कार्यालय, भोपाल के उपसचिव डाॅ. जी.एस. चैहान उपस्थित हुए। महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. विमलेन्दुतायल, डाॅ. सी.वी.गेना, डाॅ. गंगाराम जाखड़, पूर्व सांसद- डाॅ. हरि सिंह, राजस्थान विधानसभा के विधायक श्री अभिषेक मटोरिया, पंजाब विधानसभा के पूर्व विधायक श्री महेन्द्र रिणवा, संसदीय सचिव श्री जयदीप डूडी आदि गणमान्य हस्तियों ने महाविद्यालय में आगमन किया।

आज तक के सभी सेवा निवृत कर्मचारियों को ग्रेच्युटी, पी.एल. इनकेसमेन्ट व एरियर का भुगतान किया जा चुका है।

राज्य सरकार के तरफ सीटीई योजना के अन्तर्गत सत्र 2015-16 का 31.36 लाख रूपये अनुदान प्राप्त होना अभी शेष है।