सर छोटूराम स्मारक संग्रहालय

Grammothan Vidyapeeth Sangaria

अपने जीवन काल में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में स्वामी जी ने शिक्षा के क्षेत्र में जो योगदान दिया, उसका लाभ अब तक जनता प्राप्त कर रही है। इन सबके अलावा उन्होंने कला, लोककला, इतिहास, पुरातत्व, मूर्तिकला, चित्रकला, देश—विदेश की संस्कृति से परिचित करवाने वाली सामग्री से युक्त एक भव्य संग्रहालय की स्थापना संगरिया जिला—हनुमानगढ (राज.) में की। स्वतंत्रतापूर्व के संयुक्त पंजाब के किसान नेता सर छोटूराम के संगरिया आगमन के उपलक्ष्य में इसका नामकरण ‘सर छोटूराम स्मारक संग्रहालय’ ग्रामोत्थान विद्यापीठ, संगरिया कर दिया गया। सन 1938 में स्थापित संग्रहालय की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सामग्री की विविधता है। गांव के आम आदमी के काम आने वाली वस्तुओं से लेकर राजमहलों के लिये आवश्यक सामग्री, हजारों साल पहले की सभ्यताओं के अवशेष, मूर्तियां, सिक्के, बरतन, प्राचीन एवं आधुनिक चित्र यहां संग्रहीत है।

स्वतंत्रता सेनानी स्वामी केशवानंद के हृदय में शहीदों के लिये विशेष स्थान था। उन्होंने स्वतंत्रता के लिये संघर्ष में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले वीरों के चित्र संग्रहीत करवाये और उन्हें संग्रहालय में एक विशाल कक्ष में प्रदर्शित करवाया। इसे शहीद कक्ष कहा जाता है। शहीद-कक्ष के अलावा संग्रहालय में कलादीर्घा, लघुकलादीर्घा, पशुजीवन शास्त्र कक्ष, बुद्ध कक्ष, सामुद्रिक सामग्री कक्ष, संस्कृति कक्ष, शस्त्र दीर्घा, पुरातत्व कक्ष एवं स्वामी केशवानंद स्मृति कक्ष है।पत्थर, धातु, काष्ठ की मूर्तियां एवं मृण्मूर्तियां (टेराकोटा) विभिन्न कालों की है। इनका ऐतिहासिक महत्व भी है। तांबे की मूर्तियां एवं ताम्रफलकों पर बने विशाल चित्र विशेष रूप से दर्शनीय है। तांबे का एक विशाल कमंडल भी है। इस पर विष्णु अवतारों और महाभारत की घटनाओं के चित्र उकेरे हुए हैं। संग्रहालय में अन्य स्थानों के अलावा राजघाट (वाराणसी) और पल्लू (राजस्थान) से प्राप्त पुरातात्विक सामग्री है। संग्रहालय में अफ्रीकी हाथी का दिखाने का बड़ा दांत और खाने का दांत (दाढ़) भी है। इसके अलावा हाथीदांत, दूसरे पशुओं तथा मानव अस्थियों से बनी सुंदर कलाकृतियां हैं। सिख इतिहास (महाराजा रणजीतसिंह काल) की एक दुर्लभ फोटो भी है। इस संग्रहालय में क्षेत्रीय दर्शक तो आते ही रहे हैं, देश-विदेश के अनेक विद्वानों ने भी इसका अवलोकन किया है। इसे देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं.जवाहरलाल नेहरू के अलावा श्रीमती इंदिरागांधी, श्री लालबहादुर शास्त्री, श्री जगजीवनराम, श्री चरणसिंह, संत विनोबाभावे, आचार्य तुलसी, चौ.देवीलाल एवं इतिहासकार वासुदेवशरण अग्रवाल, पुरूषोत्तमदास टंडन सरीखे विद्वान इसे देख चुके हैं। पं.जवाहरलाल नेहरू ने संग्रहालय देखने के बाद अपने उद्बोधन में कहा था- स्वामी केशवानंद के निमंत्रण पर मैं सगरिया आया। शहरों में बड़े-बडे़ कालेज, विश्वविद्यालय, संग्रहालय आदि हैं परंतु गांवों में ऐसा कुछ नहीं, इसलिए इस स्थान को देखने का इच्छुक था कि यहां क्या कुछ है। जो कुछ मैंने देखा, बडे़ ध्यान से देखा और पूर्णतया संतोषजनक पाया। मैं स्वामी जी को इस बात की बधाई देता हूं कि इतने अच्छे काम आपके संगरिया में हैं और मैं आशा करता हूं कि आप इस काम को बहुत अच्छी तरह सफलतापूर्वक बढायेंगे क्योंकि आपका काम कोई व्यक्तिगत तो है नहीं। लेकिन जो सबसे बड़ा काम आपने करना है, वह इस भारत को कंधे पर रखकर आगे बढना है। स्वामी केशवानंद के देहावसान के बाद उनकी स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिये संग्रहालय में ही स्वामी केशवानंद स्मृति कक्ष बनाया गया है। यह कक्ष स्वामी केशवानंद की चालीस वर्षीय शिक्षा, समाज एवं कला की यात्रा का जीवंत दस्तावेज है। राजस्थान-पंजाब-हरियाणा के संगम संगरिया में स्थित इस संग्रहालय में समय-समय पर नई सामग्री प्रदर्शित की जाती है। संग्रहालय में दुर्लभ जंगली जानवरों और पक्षियों के मसाला भरे हुए शरीर प्रदर्शित किये गये है जो मूक जीवित प्राणी लगते हैं। इनमें एक विशाल टाईगर और अन्य कई तरह के पशु-पक्षी सम्मिलित हैं। इनकी संख्या अधिक होने के कारण इन्हें एक विशाल कक्ष में प्रदर्शित किया गया है। ज्ञान, मनोरंजन और आकर्षण के केन्द्र इस संग्रहालय का रखरखाव ग्रामोत्थान विद्यापीठ संगरिया अपने साधनों से कर रहा है। राज्यसरकार, केन्द्रीय सरकार या किसी अन्य संस्था-संगठन से कोई सहायता नहीं मिल रही है। रूचि और ज्ञान के इस केन्द्र को पर्यटन के नक्शे पर लिया जाना चाहिए।